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Yogendra Sharma
आखिर शुरुआत तो हुई...
करीब 53 साल से अपनी आत्मा की आवाज को जबरन दबाकर बैठा हाशिम अंसारी आखिरकार गत बुधवार को फूट ही पड़ा। पिछले पाँच दशक से वह टुकुर-टुकुर यही तो देख रहा था कि लोग किस तरह अयोध्या में बाबरी को सीढ़ी बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं। आखिर कब तक कोई इंसान अपनी आँखों के सामने जुल्म होते देख सकता है? आखिरकार 93 वर्ष की उम्र में हाशिम अंसारी की नजरों में इंतेहां हो गई, उससे अब यह देखा नहीं गया कि धूर्त लोग लड्डू खा रहे हों जबकि रामलला को केवल इलायची दाना...मक्कार लोग कोठियों में रह रहें जबकि रामलला तिरपाल में...। अयोध्या केस में 1961 में अंसारी वादी के रूप में शामिल हुए थे। उस वक्त उनकी उम्र करीब 32 वर्ष थी। केस तो 1949 से चल रहा था किंतु उन्होंने इस केस में 12 वर्ष बाद कदम रखा। लगातार धोखा, फरेब, झूठ और पाखण्ड से तंग आकर आखिर हाशिम अंसारी चीख उठा, बोला- ''''''''''''''''बहुत हुआ, अब आजादा हो रामलला।''''''''''''''''अयोध्या में विवादित ढांचे को ध्वस्त किये जाने की 22 वीं बरसी से ऐन पहले अदालत में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में पैरोकार हाशिम अंसारी ने इस स्थल पर श्री राममंदिर निर्माण किये जाने की पुरजोर वकालत करते हुए खुद को मुकदमे से अलग करने का ऐलान कर दिया है। हालांकि अंसारी के इस ऐलान से उच्चतम न्यायालय में चल रहे इस मामले पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, फिर भी मामले में एक पक्षकार ने खुद को मुकदमे से अलग करने की शुरुआत तो कर ही दी है। हाशिम का कहना है कि वे इस मुद्दे पर हो रही सियारत से तंग आ चुके हैं। उन्होंने सपा नेता अजम खां को कौम का गद्दार बताते हुए कहा कि वह अयोध्या मसले का राजनीतिक फायदा उठाकर ही मंत्री बन गए हैं। उन्होंने कहा कि आजम खां बाबरी मस्जिद एक्शन कमेठी के संयोजक थे लेकिन बाद में इससे अलग होकर वह राजनीतिक लाभ के लिए मुलायम सिंह यादव से जुड़ गए। अंसारी ने कहा कि मैं आजादी के बाद जब से वहां रामलला की मूर्ति रखी गई, तब से देख रहा हँू कि इस मुद्दे पर चाहे हिंदू नेता हों या मुसलमान, सभी अपनी-अपनी रोटियां सेंक रहे हैं। नेताओं के चलते लगता है इस केस का फैसला कयामत तक नहीं हो सकता।अंसारी ने यह भी कहा कि वर्ष 2010 में उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिक सौहार्द के लिए संवेदनशील इस मसले का हल अदालत की चारदीवारी के भीतर नहीं बल्कि आपसी बातचीत के जरिए तलाश जाना चाहिए किन्तु उनकी सलाह को अनसुना करते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी और अन्य ने अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया जिसके पीछे मसले का हल निकालना नहीं बल्कि आजम खां जैसे मौका परस्त नेताओं द्वारा अपने राजनीतिक स्वार्थ को सिद्ध करना था।जाने-माने सुन्नी धर्मगुरु, मौलाना खालिद रशीद फरंगीमहली ने हालांकि कहा है कि अयोध्या मुकदमे के मुख्य पैरोकार हाशिम अंसारी द्वारा खुद को मामले से अलग करने से उच्चतम न्यायालय में लंबित मामले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन उन्होंने स्वीकार किया है कि वह खुद भी अयोध्या मसले पर राजनीति के बजाय चाहते हैं कि यह मामला सौहार्दपूर्ण तरीक से जल्द से जल्द हल हो।यानी अब यह आसानी से कहा जा सकता है कि अयोध्या मामले में आखिर एक अच्छी शुरुआत हो चुकी है। पहले अंसारी, फिर फरंगीमहली और आगे न जाने कौन-कौन? इस मामले पर राजनीति के बजाय सौहादपूर्ण तरीके के पैराकार जन्म ले रहे हैं।
Textile News
ऊनी वस्त्र के बाजार सजे.......
उदयपुर/ जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे स्थानीय वस्त्र बाजार में ऊनी वस्त्रों की मांग बढ़ती जा रही है। सर्दी के मद्देनजर ऊनी वस्त्र के बाजार भी सज चुके हैं। शहर में कई प्रतिष्ठान ऐसे हैं जहां मौसम के अनुसार वस्त्र विक्रय किये जाते हैं। अत: उन सभी प्रतिष्ठानों पर इन दिनों में ऊनी वस्त्र अन्य वस्त्र की अपेक्षा में ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। हालांकि सर्दी ने अभी अपना वास्तविक रूप नहीं दिखाया है। सूरज ढलने के पश्चात् से प्रात: तक ही सर्दी का अहसास हो रहा है और दिन भर धूप में तेजी रहने से गरमी रहती है। इसलिए ऊनी वस्त्रों की बिक्री में तेजी का अभाव है। स्थानीय वस्त्र विक्रेताओं के अलावा शहर में प्रतिवर्ष दो ......
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20/01/2015 To 22/01/2015
28/01/2015 To 30/01/2015
Events
TAI की एमपी यूनिट ने आयोजित किया अवॉर्ड समारो....
पंचमढ़ी/ टेक्सटाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टाई) की एमपी यूनिट का अवार्ड समारोह पंचमढ़ी के ग्लेन व्यू होटल में पिछले दिनों आयोजित हुआ।
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''टाई'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''' की एमपी यूनिट के 50 वर्ष पूर्ण करने के अवसर पर इस समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथिश्री अरविंद सिन्हा एवं विशिष्ट अतिथियों में केन्द्रीय मंत्री श्री डी. आर. मेहता, चेयरमैन श्री के.डी. संघवी, वाइस चेयरमैन श्री एन.एन. महापात्रे, जॉइण्ट चेयरमैन श्री दीपक सक्सेना, चेयरमैन श्री एम.के. मेहरा, प्रेसिडेण्ट श्री एन.एस. निर्बन एवं सेके्रटरी श्री अशोक वेदा शामिल थे।
श्री एन.एस. निर्बन ने स्वागत उद्बोधन दिया। सभी सम्मानीय अतिथियों का मोतियों की माला के साथ सम्मान किया गया। टेक्सटाइल एसोसिएशन ऑफ इण्डिया की एमपी यूनिट ने इस अवसर पर कुछ गणमान्य व्यक्तियों को लाइफटाइम अचीवमेण्ट अवार्ड से सम्मानित किया। सेके्रटरी श्री अशोक वेदा ने इन सम्मानित व्यक्तियों की उपलब्धियों के बारे में बताया।
स्पिनर्स क्लब मैगजीन के दीपावली संस्करण को श्री अरविंद सिन्हा ने रिलीज किया और पहली कॉपी श्री एम.के. मेहरा को भेंट की गई। श्रीमती ऋचा वेदा को भी उनकेद्वारा प्रदान किये गए सहयोग के लिये सभी ने सराहा।
श्री अशोक वेदा ने सभी का इस कार्यक्रम मे आने के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने श्री के. गांधीराज का भी अपनी व्यस्ततम दिनचर्या से टाई की एमपी यूनिट के लिये कुछ समय निकालकर कोयम्बटूर से पंचमढ़ी आने के लिये आभार ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के पश्चात् जीसी मीटिंग हुई। मीटिंग के बाद होटल गोल्फ व्यू में संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सभी ने कार्यक्रम का भरपूर आनन्द लिया एवं काफी सराहना की।
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Interviews
श्री रमेश पोद्दार
श्री रमेश पोद्दार
अध्यक्ष - फेत्मा
हम अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल व्यापार में अपनी भूमिका और अपना हिस्सा बढ़ा सकते हैं - श्री रमेश पोद्दार फैडरेशन ऑफ आल इण्डिया टेक्सटाइल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (फेत्मा) की 13 वीं वार्षिक साधारण बैठक 26 सितंबर को मुम्बई में सम्पन्न हुई।  इस अवसर पर ‘फेत्मा’ के अध्यक्ष रमेश पोद्दार से देश की टेक्सटाइल इण्डस्ट्री के बारे में ‘टेक्सटाइल वल्र्ड’ के प्रतिनिधि विनोद सिंह की विस्तृत चर्चा हुई। प्रस्तुत है चर्चा के प्रमुख अंश :  
प्रश्न - चालू वित्त वर्ष को आप किस तरह देखते है ?    
श्री रमेश पोद्दार - वित्त वर्ष 2014-15 कई मायनों में महत्त्वपूर्ण है। देश में नयी सरकार का गठन हुआ है। सारा देश माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ इस आशा से देख रहा है कि देश की आर्थिक एवं प्रशासकीय समस्याओं का शीघ्र हल निकले।  गत कुछ वर्षों से देश की आर्थिक एवं शासकीय स्थिति अच्छी नहीं रही है। नव केन्द्रीय शासन के साथ ही बेशक स्थिति में सुधार का श्रीगणेश हो गया है। मगर प्रधानमंत्री भी कोई जादू की छड़ी लेकर तो आए नहीं कि पलक झपकते ही सब कुछ ठीक हो जाये।
प्रश्न- अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल क्षेत्र में आप भारत का क्या भविष्य देखते हैं?
श्री रमेश पोद्दार- 2013-14 में 40 अरब डॉलर का टेक्सटाइल एवं क्लोथिंग का एक्सपोर्ट रहा।  पूरे विश्व के टेक्सटाइल एवं क्लोथिंग के ट्रेड में 6.77 प्रतिशत का ग्रोथ हुआ। जनवरी से दिसम्बर 2012 में यह 710.64 अरब यूएस डॉलर था जो जनवरी से दिसम्बर 2013 में 758.77 अरब यूएस डॉलर हो गया। इस अवधि के दौरान भारत में 11.27 प्रतिशत का ग्रोथ रहा। यद्यपि 10 प्रमुख निर्यातक देशों में वियतनाम प्रथम, बांग्लादेश द्वितीय एवं चीन तीसरे नम्बर पर रहा।  पूरी दुनिया में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में चीन का 36 प्रतिशत हिस्सा है जो सर्वाधिक है, जबकि भारत का 4.82 प्रतिशत शेयर है। चीन में उत्पादन खर्च बढ़ता जा रहा है। वहां लेबर कॉस्ट बढ़ गया है, पावर कॉस्ट बढ़ गया है। इससे भारत जैसे अन्य देशों के सामने संभावनाए बढ़ गयी है। हम अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल व्यापार में अपनी भूमिका और अपना हिस्सा बढ़ा सकते हैं।
प्रश्न - टेक्सटाइल मंत्रालय का विजन स्टेटमेण्ट क्या है ?
श्री रमेश पोद्दार - नेशनल टेक्सटाइल कम्पीटीटिव कॉउंसिल के मेम्बर सेके्रट्री श्री अजय सरकार की अध्यक्षता में टेक्सटाइल मंत्रालय ने एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। इस एक्सपर्ट कमेटी ने भारतीय टेक्सटाइल एवं अपेरल सेक्टर के लिए विजन, रणनीति एवं एक्शन प्लान बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात में 20 प्रतिशत ष्ट्रत्रक्र के साथ भारत 2024-25 तक 300 अरब यूएस डॉलर का सालाना निर्यात लक्ष्य पूरा कर लेगा। इसके अलावा डोमेस्टिक टेक्सटाइल में 12 प्रतिशत ष्ट्रत्रक्र की उम्मीद है। इस तरह टेक्सटाइल एवं अपेरल के सेल 2024-25 तक बढक़र 350 अरब यूएस डॉलर का हो जाएगा, इस तरह टेक्सटाइल इंडस्ट्री का मौजूदा साइज 120 अरब यूएस डॉलर से बढक़र 650 अरब यूएस डॉलर हो जाएगा। भारत के टेक्सटाइल उद्योग के स्ट्रेंथ, एफीसिएंसी और उत्पादकता को देखते हुए इस प्रोजेक्टेड ग्रोथ लेवल तक पहुँचना मुश्किल नहीं है। अगर सब कुछ इसी तरह ठीक रहा और सही मांगे पूरी हो जाती है तो इस प्रोजेक्टेड लेवल तक या इसके करीब तक पहुँचना संभव है। अगर यह होता है तो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग हिमालय की एवरेस्ट चोटी तक पहुँच सकता है।
प्रश्न - मेक इन इंडिया पर आपकी क्या राय है ?
श्री रमेश पोद्दार - अपने देश को उत्पादन का केन्द्र बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ के नारे का हम स्वागत करते हैं।  भारत एक अग्रणी सर्विस प्रोवाइडर है। जैसे ही हम उत्पादन में अग्रणी होंगे और अपनी सेवा की क्षमता को बढ़ा लेंगे वैसे ही भारत एक बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो सभी आर्थिक और राजनैतिक समस्याओं का निदान हो जाएगा।
प्रश्न - क्या टेक्सटाइल उद्योग को ऑनलाइन रिटेलिंग से सहायता मिलेगी।
श्री रमेश पोद्दार - टेक्सटाइल उद्योग एक क्रांति की शुरुआती दशा में है। खपत बढऩे की पर्याप्त सम्भावनाएं हैं। कुछ टेक्सटाइल कम्पनियों ने ब्रांडेड ऑफर के साथ लोकल टेलरिंग सेवाओं से सम्पर्क साधा है। डिजिटल मेडियम के सहारे फैब्रिक ब्रांड को बूस्ट मिलेगा। फैब्रिक हो या गारमेण्ट, टेक्सटाइल कम्पनियां अपने उत्पाद की ऑन लाइन मार्केटिंग के लिए ई-रिटेलर्स की मदद की योजना बना रहे हैं। इससे वितरण खर्च बचेगा। उसके घर के पास सब कुछ आसानी से उपलब्ध होगा और इससे समय, ऊर्जा और धन की बचत होगी। तब हम उन्हें कम दाम पर फैब्रिक और गारमेण्ट उपलब्ध करा पाएंगे। मेरा ख्याल है उत्पादकों को इस नयी रणनीति का लाभ उठाना चाहिए। 
प्रश्न - गुड्स एंड सर्विस टैक्स के विषय में आपका क्या नजरिया है ?
श्री रमेश पोद्दार - गुड्स एवं सर्विस टैक्स (त्रस्ञ्ज) का टेक्सटाइल उद्योग के बड़े हिस्से ने स्वागत किया है। यह उद्योग के लिए अच्छा है। त्रस्ञ्ज के लाभ-हानि पर उद्योग के सभी सेग्मेण्ट के विचारों को शामिल करने की जरुरत है।