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Yogendra Sharma
सबसे बड़ा ''लोकतांत्रिक'' देश
पूरा देश संसद के मानसून सत्र पर अपनी निगाहें जमाए बैठा है, इस उम्मीद में, कि उनके द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि उनकी तथा देश की भलाई में कदम उठाएंगे, किन्तु मानसून सत्र की शुरुआत के दिन से ही लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के सांसद हंगामा करके कार्यवाही को बाधित करने में ही अपनी शान समझ रहे हैं।

15 वीं लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नेशनल डेमोके्रटिक अलायंस (एनडीए) ने अधिकांश समय हंगामा कर कार्यवाही को बाधित किया तो अब कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए ऐसा कर रही है। क्या इससे यह मतलब नहीं निकलता है कि जो विपक्ष में होगा उसे अपने मुद्दे को पुरजोर तरीके से जनता के सामने लाने के लिए संसद की कार्यवाही को बाधित करना ही पड़ेगा?बताया जाता है कि एक दिन की संसद की कार्यवाही का खर्चा करोड़ों रुपये आता है जो जनता की खून-पसीने की कमाई का हिस्सा होता है।

 क्या जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि संसद को हंगामे की भेंट चढ़ाकर जनता की करोड़ों रुपये की कमाई को मटियामेट नहीं कर रहे?किसी भी संसद के चार कार्य होते हैं-कानून बनाना, सरकार को खर्च करने की अनुमति देना, सरकार के कार्यों की समीक्षा करना और राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस करना। इन चार कार्यों में से एक कार्य भी यह इजाजत नहीं देता कि अगर मुद्दा गंभीर हो तो संसद की कार्यवाही को रोक दिया जाए।

क्या हम नासमझी में प्रजातंत्र के मंदिर के रूप में विकसित की जाने वाली इस संस्था को गलत दिशा में नहीं ले जा रहे हैं। हम यह क्यों भूलते जा रहे हैं कि ब्रिटेन की संसद जो पूरे विश्व की संसदों की जननी मानी जाती है, में शायद ही कभी कार्य-बाधित हुआ हो।

लगभग सौ वर्षों से अंग्रेज मना करते रहे कि ब्रितानी संसदीय प्रणाली भारत के लिए अभी उपयुक्त नहीं है लेकिन तत्कालीन नेताओं की जिद के तहत यह व्यवस्था अपनाई गई। इसका नतीजा हमारे सामने है। हमने संसदीय फॉर्मेट तो ब्रितानी से ले लिया किन्तु उसे चलाने के लिए जो नैतिक संबल चाहिए था, वह अभी भी नदारद है।

ब्रितानी संसदीय प्रणाली और भारतीय संसदीय प्रमाणी के बीच अंतर को जानने के लिए यह उदाहरण काफी है कि आज से करीब 90 साल पहले ''केम्पबेल घटना" में राजनीतिक कारणों से एक व्यक्ति के ऊपर से केवल मात्र आपराधिक मुकदमे उठाने का फैसला लेने की वजह से ब्रिटेन की लेबर पार्टी के प्रधानमंत्री राम्से मैकडोनाल्ड की सरकार को इस्तीफा देना पड़ गया था, वहीं दूसरी ओर भारत में उत्तरप्रदेश, बिहार या मध्यप्रदेश में आतंकवाद के तमाम अभियुक्तों पर से सरकारें शुद्ध राजनीतिक कारणों से अक्सर मुकदमें उठा लेती हैं या किसी क्षेत्र विशेष में अपराधी पकडऩे के लिए छापे मारने की इजाजत पुलिस को नहीं देती और किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।हम देख रहे हैं कि नेता किसी भी दल के क्यों न हों।

उन्हें अपनी सुख सुविधाओं के लिए एक मंच पर आते देर नहीं लगती किंतु जब बात देश के करोड़ों लोगों की समस्याएं हल करने की हो तो उनको हंगामा करने से फुर्सत नहीं।हम महान लोकतांत्रिक देश होने का दावा तो करते हैं लेकिन लोकतांत्रिक देश की मर्यादाओं को नही।
Textile News
टेक्सटाइल को बढ़ावा देने आदित्य बिड़ल.......
मुंबई। टेक्सटाइल मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप अपने सभी पार्टनर्स को सपोर्ट करने पर काम कर रहा है। इस इनिशिएटिव के तहत कंपनी डिजाइन, डेवलपमेंट, टेक्निकल सपोर्ट के साथ मार्केटिंग और बायर लिंकेज को बढ़ावा देने पर काम करेगी।

 कंपनी का मकसद भारत को टेक्सटाइल मार्केट में सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का है। आदित्य बिड़ला ग्रुप इस वक्त 4100 करोड़ यूएस डॉलर की कंपनी है। कंपनी ने इस इनिशिएटिव को लीवा एक्रीडेटेड पार्टनर फोरम (एलएपीएफ) नाम दिया है।

इसके तहत कंपनी की सहयोगी इकाई बिरला सेल्युलोस, स्टेकहोल्डर 4 दिसंबर को कनक्लेव का आयोजन करने जा रही है। यह कनक्लेव साउ......
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इटली का ''केडिनी'' ब्राण्ड अब हुआ ''सियाराम्स....
मुम्बई/ देश एवं विदेश में अपनी अतुल्य क्वालिटी एवं डिजाइन्स के लिए सुप्रसिद्ध ''सियाराम सिल्क मिल्स लि.'' ने इटली के लाइफस्टाइल ब्राण्ड ''केडिनी'' की मैन्युफेक्चरिंग व मार्केटिंग के मालिकाना हक अर्जित कर लिए हैं। कम्पनी ने ये अधिकार भारत, श्रीलंका व कुछ अन्य मध्य पूर्व के देशों के लिए हासिल किये हैं।

कम्पनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डाइरेक्टर श्री रमेश पोद्दार के अनुसार कम्पनी भारतीय एवं अन्य एशियाई देशों के अपने ग्राहकों हेतु वाजिब कीमतों पर इटेलियन फील उपलब्ध कराना चाहती है। उन्होंने बताया कि इस लाइफस्टाइल ब्राण्ड का कुछ हिस्सा इटली से आयातित होगा जबकि अधिकांश भाग भारत में ही निर्मित होगा।श्री पोद्दार ने कहा कि ''''हम इटली के इनोवेशन्स एवं मैन्युफे क्चर्स भारतीय ग्राहकों के लिए ला रहे हैं।

ज्ञातव्य है कि सियाराम सिल्क मिल्स की वार्षिक आय 1500 करोड़ रु. के करीब है जबकि चालू वर्ष में इसके 10-15 प्रतिशत बढऩे की उम्मीद है। श्री पोद्दार के अनुसार ''केडिनी'' ब्राण्ड से अगले वित्त वर्ष में कम्पनी को 100 करोड़ रु. के योगदान की आशा है। <br><br>श्री पोद्दार ''केडिनी'' ब्राण्ड के लॉञ्च के अवसर पर प्रेस से मुखातिब थे। उन्होंने बताया कि ''केडिनी'' ब्राण्ड सियाराम के लिए सोर्सिंग एवं डिजाइनिंग का कार्य भी करेगी।

यह ब्राण्ड भारत में अपने सुपिरियर फैब्रिक्स के साथ उपलब्ध रहेगा जबकि निकट भविष्य में इस लाइफस्टाइल ब्राण्ड के तहत गारमेण्ट तथा एसेसरीज के एक्सक्लूसिव आउटलेट्स एवं शॉप-इन-शॉप भी खोले जाएंगे।''केडिनी'' ब्राण्ड की लॉन्चिंग सेरेमनी में ''केडिनी'' की निदेशक सुश्री डेनिएला निकॉले फराली ने कहा कि ''''हमें भारत के तेजी से बढ़ते बाजार में बेहतर समझ रखने वाले, विश्वसनीय एवं उपभोक्ता की नब्ज समझने वाले पार्टनर की आवश्यकता थी, वो हमें सियाराम्स में दिखी।

विश्व के 44 देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाला ''केडिनी'' ब्राण्ड, प्रतिष्ठित सियाराम के साथ मिलकर न सिर्फ भारतीय उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा बल्कि वैश्विक परिदृश्य पर भी बेहतर प्रदर्शन करेगा।<br><br>" उल्लेखनीय है कि ''केडिनी'' अपनी आय का 95 प्रतिशत अन्तरराष्ट्रीय बाजार से अर्जित करता है जबकि मात्र 5 प्रतिशत ही इटेलियन बाजार से आता है।

इधर ''सियाराम्स'' ने इस वर्ष अपनी मैन्युफेक्चरिंग क्षमता को आधुनिक बनाने हेतु 80 करोड़ रु. खर्च किए हैं और अगले वर्ष कम्पनी इसी योजना पर 70 करोड़ रु. खर्च करेगी। श्री रमेश पोद्दार ने बताया कि इस आधुनिकीकरण योजना से कम्पनी की उत्पादन क्षमता प्रतिमाह 65 लाख मीटर फैब्रिक से 10-15 प्रतिशत बढ़ जाएगी। लॉन्चिंग सेरेमनी में 1200 से अधिक थोक एवं रिटेल व्यवसायी उपस्थित थे। इन लोगों ने नए ब्राण्ड कलेक्श्न के फैब्रिक, कलर आदि की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

भारतीय बाजार को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए कम्पनी ने 100 प्रतिशत लॉन्ग स्टेपल कॉटन, 100 प्रतिशत गिजा कॉटन, 100 प्रतिशत लिनन, वूल कश्मीरी, वूल-सिल्क-लिनन, 100 प्रतिशत सिल्क, वूल ब्लेण्ड्स, 100 प्रतिशत लिनन एवं टी आर में जेकेटिंग फैब्रिक्स की एक्सक्लूसिव रेंज डवलप की है।कम्पनी परिचय - इटली का लाइफस्टाइल ब्राण्ड ''केडिनी'' यहाँ का एक लोकप्रिय फैशन ब्राण्ड है जो इग्ंलैण्ड, मैक्सिको, रूस, यू.एस.ए., चीन सहित विश्व के 44 देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है ।

 कम्पनी इटली स्थित अपनी उत्पादन इकाई में ही फाइनेस्ट क्वालिटी मटेरियल्स का उत्पादन करती है। कम्पनी फैब्रिक्स से डिजाइन व अन्तिम उत्पाद तक क्वालिटी पर पैनी नजर रखती है। कम्पनी के कलेक्शन में लग्जरी मेन्स सूट्स, शटर््स, फैब्रिक्स, जैकेट्स, सिल्क टाईज, स्टाइलिश लेदर शूज तथा विभिन्न एसेसरीज शामिल हैं। कम्पनी के स्वयं के विश्व में 40 से अधिक फे्रन्चाइजी स्टोर्स हैं। सियाराम्स -''सियाराम सिल्क मिल्स लि.'' देश के सबसे बड़े ब्लेण्डेड हाई फैशन सूटिग्ंस, शर्टिग्ंस तथा अपेरल्स उत्पादकों में से एक है।

 ''सियाराम्स'' पोर्टफोलियो में इसके अतिरिक्त गारमेण्ट्स, होम फर्नींशिंग्स तथा महिला परिधान भी शामिल हैं। इसके प्रमुख ब्राण्ड्स में ''ऑक्जमबर्ग", जे. हेम्पस्टेड तथा सिया आदि हैं। लगभग 3 दशक से उत्पादनरत इस कम्पनी की उत्पादन क्षमता 60 मिलियन मीटर फैब्रिक्स प्रतिवर्ष है जो देशभर में 1 लाख से अधिक रिटेलर्स के द्वारा बिक्री किया जाता है। कम्पनी अपने उपभोक्ताओं को ''वैल्यू फ ॉर मनी" उत्पादन उपलब्ध कराने में विश्वास रखती है।
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ऐसा क्यों होता है कि कई बार सब कुछ होते हुए भी हम वो नहीं कर पाते जिसको करने के बारे में हमने सोचा होता है ….दृढ निश्चय किय....
मैं कई बार ऐसे लोगों से मिल चुका हूँ जो मुझसे अपने dream business की शुरुआत करने की बात करते है , घंटों planning करते हैं … .. बतात....
Interviews
श्री संजीव लाठिया
श्री संजीव लाठिया
इण्डिया ITME सोसाइटी के चेयरमैन - GTTES
GTTES - 20154 टेक्सटाइल मशीनरी उद्योग के लिए संभावनाओं का द्वार

मुम्बई गत 20 जनवरी से 22 जनवरी, 2015 तक मुम्बई के एग्जिक्यूटिव सेण्टर गोरेगांव में Globle Textile Technology abd Engineering Show -2015 (GTTES - 2015) आयोजित की जा रही है।
इसमें विश्वभर से उत्पादित टेक्सटाइल मशीनरी एवं टेक्नोलॉजी का डिस्प्ले किया गया। इण्डिया ITME सोसाइटी के चेयरमैन श्री संजीव लाठिया ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मॉडर्न टेक्नोलॉजी को भारत लाने के उद्देश्य से 34 वर्ष पूर्व ITME सोसायटी का श्रीगणेश हुआ था। इसने टेक्सटाइल उद्योग के विकास में एक उत्प्रेरक का कार्य किया है। ITME सोसायटी ने सफलता पूर्वक अपने काम को अंजाम दिया है। इस वर्ष इस संस्था ने नये बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए नयी चुनौती को स्वीकार किया है।
GTTES एशियन बाजार तथा टेक्सटाइल मशीनरी एक्सेसरीज, स्पेयर पार्ट्स रॉ-मेटेरियल्स तथा सम्बद्ध सेवा आदि का एक व्यापक (एक्सक्लूसिव) शो है जिसे ITME सोसयाटी ने आयोजित किया है।
श्री लाठिया ने बताया कि इस विशेष प्रदर्शनी के कई उद्देश्य हैं। यह टेक्नॉलोजी एवं मशीनरी की प्रदर्शनी के साथ ही उच्च क्वालिटी, वैरायटी, एलायड सर्विसेज की प्रदर्शनी भी है। यह छोटे और मध्यम एंटरप्राइजेज वाले क्लाइंट की बड़ी मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी महज एक प्रदर्शनी नहीं है। यह बिजनेस आदि को एक माहौल भी प्रदान करेगा। बेहतर नेटवर्किंग की बदौलत यह सेल और सर्विस की क्वालिटी भी उन्नत करेगा। यह व्यक्तिगत अंत:क्रिया के माध्यम से कस्टमर्स संबंधों को प्रगाढ़ करेगा। यह ओवरसीज, रिजनल, डोमेस्टिक बाजारों में नई लीडरशिप भी डवलप करेगा तथा यह छोटे और मध्यम क्लाइंट बेस तक पहुँचेगा।

GTTES 2015 का महत्व - एशिया में उपलब्ध संभावनाओं की तरफ विश्व की नजर खीचनें के उद्देश्य से ये प्रयास जारी है।

आज एशिया टेक्सटाइल मशीनरी का सबसे बडा बाजार एवं विश्व टेक्सटाइल उद्योग का केन्द्र है। आज एशियन बाजार को हाई परफोर्मेंस, हाई क्वालिटी, ऑटोमेशन की हाई डिग्री तथा इनर्जी सर्विस मशीनरी एवं इक्विपमेण्ट की निहायत जरूरत है।
इंटर एशिया टे्रड प्रेडिक्शन के अनुसार एशिया महादेश नये फेज में प्रवेश करने जा रहा है। 2015 तक इंटर- एशिया ट्रेड की मौजूदा 180 बिलियन यू एस डॉलर की तुलना में दुगुना होकर 350 बिलियन यूएस डॉलर के होने की संभावना है। तब यह निर्यातक देशों के लिए सबसे बड़ा मार्केट ब्लॉक बन जाएगा।
श्री संजीव लाठिया ने बताया कि 180 बिलियन यूएस डॉलर के वृहत इंट्रा एशिया-टे्रड के 8 प्रतिशत CAGR की दर से वृद्धि को देखते हुए, इंडिया ITME सोसायटी ITME सीरीज के साथ अलटरनेटली एक्जीबीशन लॉञ्च कर रही है।
श्री लाठिया ने कहा कि भविष्यवाणी की गयी है कि आगामी वर्षों में विश्व टेक्सटाइल उद्योग एवं टेक्सटाइल इंजिनीयरिंग उद्योग का केन्द्र एशिया होगा। विश्व का 70 प्रतिशत से अधिक फाइबर प्रोसेसिंग एशिया में होता है। चीन, भारत एवं पाकिस्तान संयुक्त रूप से 60 प्रतिशत फाइबर उपयोग में लाते हैं।
यह भी भविष्यवाणी की गयी है कि चीनी एवं भारतीय अपेरल-मार्केट का आकार अमेरिका एवं यूरोप के संयुक्त मार्केट आकार से बढऩे जा रहा है। टेक्सटाइल इंजिनीयरिंग एवं सेवा के लिए भविष्य में यह संभावनाओं का द्वार खोलेगा। बांग्लादेश एवं वियतनाम भी प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल देश के रूप में उभर रहे हैं।
टेक्सटाइल एवं अपेरल एक्सपोर्ट के एक शक्तिशाली टे्रड ब्लॉक के रूप में संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए टेक्सटाइल उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि एशियन-कंट्रीज में बिजनेस टाई-अप्स स्थापित किए जाय और इस बढ़ाया जाए।
इंडिया ITME सोसायटी के चेयरमैन श्री लाठिया ने बताया कि GTTES - 2015 की प्लानिंग एवं रुपरेखा इस तरह तैयार की गयी है ताकि यह एशियन-टेक्सटाइल मार्केट के लिए एक्सक्लूसिव एवं फोकस्ड बिजनेस इवेंट साबित हो।

श्री लाठिया ने कहा कि भारत के डोमेस्टिक कंजम्पशन एवं निर्यात के लिए भारतीय उत्पादन विश्व के औसत उत्पादन से आगे ग्रोथ के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि 2025 तक उम्मीद है कि भारतीय डोमेस्टिक अपेरल कंजम्पशन बढ़कर 200 बिलियन यूएस डॉलर हो जाएगी, जो विश्व के कई बड़े कन्ज्यूमर्स जैसे जापान, ब्राजील, रूस आदि से ज्यादा है। 2025 में 2012 के 45 बिलियन यूएस डॉलर का 4 गुणा बढ़ा जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारत अपेरल, हैडीक्राफ्ट और कुछ अन्य उद्योगों के लिए उभरता हुआ मल्स एवं रिटेल इंडस्ट्री एक व्यापक संभावना पैदा करता है। यह संभावना पूरे वैल्यूचेन तथा अन्य प्रॉडक्ट सेग्मेंट सभी के लिए होगा।

इसी के बीच से मशीनरी सप्लायर्स एवं इससे संबंद्ध व्यापार जैसे केमिकल्स कन्ज्यूमेबल्स, लॉजिस्टिक सभी के लिए व्यापक बाजार खुलेगा।
उन्होंने भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि इसमें टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम ने 1,51,000 करोड़ रुपयों की बदौलत मशीनरी सेक्टर को एक बड़ा सपोर्ट दिया है।
श्री लाठिया ने कहा कि इसमें अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए उत्पादकों एवं टे्रडरों को क्षेत्रीय बाजार एवं ग्रामीण बाजार पर ध्यान केंदित करना पड़ेगा। इसमें अपार अनएक्स्प्लोर्ड वर्जिन संभावनाएं दिखायी पड़ेगी, जिसका वे लाभ उठा सकेंगे।
जरुरत है सप्लाई चेन डवलप करने की, जो उभरती डोमेस्टिक बाजार को कैटर कर सके। साथ ही पड़ोसी एशियन देशों में भी कस्टमर्स ढुढऩे की जरूरत नहीं पड़ेगी।