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Yogendra Sharma
मोदी के रहते क्या किसी की जुर्रत हो सकती ?
जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार बनाने के तुरंत बाद जिस प्रकार से जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मेाहम्मद सईद ने बयान दिए हैं वे चौंकाने वाले कतई नहीं कहे जा सकते। क्योंकि मुफ्ती मोहम्मद सईद वो शख्स है जिसके बारे में कहा जाता है कि पाकिस्तान के इशारे पर उन्होंने भारत की जेलों में बंद खूंखार आतंकवादियों को छुड़वाने के लिए अपनी ही बेटी रुबिया का अपहरण करवा लिया था, उस वक्त वे केन्द्र सरकार के गृहमंत्री थे। ऐसे शख्स के मुंह से यदि पाकिस्तान और हुर्रियत जैसे अलगाववादी तत्वों के हित में कोई बात उगलती है तो आश्चर्य कैसा? क्या कौअे के मुंह से कोयल की बोली की अपेक्षा करना मुर्खता नहीं है? क्या भाजपा नहीं जानती कि मुफ्ती सईद किस तरह का व्यक्ति है? हमारा उद्देश्य यह नहीं है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद जैसा व्यक्ति कुछ भी बोलता रहे तो उस पर हमें ध्यान देने की आवश्यकता नहीं, हमारा उद्देश्य यह है कि जब भाजपा ने पीडीपी से गठबंधन कर ही लिया है तो उसे ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, ऐसा दबाव बनाए रखना होगा कि गठबंधन में शामिल पार्टी का कोई भी व्यक्ति ऐसा कोई बयान नहीं दे सके जो जम्मू-कश्मीर में अलगाव को बढ़ावा दे।

फिर भी यदि मुफ्ती जैसे लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आएं तो जम्मू-कश्मीर में ऐसे लोगों या ऐसी पार्टी के साथ गठबंधन जारी रखना कोई जरूरी नहीं है। श्री नगर की सरकार भंग हो जाए, तो हो जाए किन्तु ऐसा कत्तई नहीं होना चाहिए कि हुर्रियत पृष्ठभूमि वाले पीडीपी के कई विधायक ऐसा वातावरण तैयार करने में सफल हो जाए जिससे कश्मीर को पाकिस्तान के हवाले करने की दिशा में किसी भी प्रकार की कोई कोशिश हो।

मुफ्ती की बयानबाजी पर एक सवाल उभरकर आता है कि यदि आज भाजपा विपक्ष में होती और मुफ्ती सईद पाकिस्तान और हुर्रियत के पक्ष में ऐसी बयानबाजी करते जो उन्होंने अभी मुख्यमंत्री बनते ही की है, तो क्या भाजपा संसद को ठप नहीं कर देती, देशभर में क्या हंगामा नहीं मचा देती?

एकबात और, सार्क यात्रा के तहत भारतीय विदेश सचिव जय शंकर पिछले दिनों इस्लामाबाद पहुँचे। जहां उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष अजीज अहमद चौधरी से मुलाकात की और सीमा पर आतंकवाद पर चिंता जताकर कहा, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही पिछले अगस्त माह से रूकी हुई भारत-पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्ता बहाल हो गई। जब पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारत के एक सवाल के जवाब में कई बार कहा है कि पाकिस्तान हुर्रियत से बराबर सम्पर्क बनाए रखेगा। और इसी हुर्रियत के बहाने हमारी सरकार ने गत वर्ष अगस्त में भारत-पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्ता स्थगित कर दी थी। तो यहां यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पाक की हुर्रियत के बारे में जब नीति नहीं बदली है तो ऐसी क्या आफत आ गई कि भारत ने इस रूकी हुई वार्ता को फिर से बहाल कर दिया? क्या इसका यह अर्थ लगाया जाए कि मुफ्ती मोहम्मद सईद से ज्यादा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं चाहते हैं कि पाकिस्तान से बातचीत शुुरु हो, और क्या इसी वजह से उन्होंने दक्षेस के बहाने विदेश सचिव जयशंकर को पाकिस्तान भेजा है? यदि यह सही है तो फिर गत अगस्त में वार्ता रोकने का नाटक करने की जरूरत क्या थी?

एक बात और, गत दिनों राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ''''लोकतंत्र में धमकियां नहीं चलतीं। न पहले किसी की चली हैं, न अब चल सकती हैं। आपातकाल से बड़ी धमकी इस देश के लिए क्या होगी...।''''

प्रधानमंत्री के इस जवाब से लगता है कि देश में अब एक निर्भीक सरकार है और उसी की पार्टी की सरकार कश्मीर में भी है। अभी हमारी फौजें भी वहीं है। तो फिर अफजल के शव के अवशेष उसके परिजन को सौंपने के संबंध में डर कैसा? भयंकर से भयंकर अपराधियों के शव उनके परिजनों के हवाले किए ही जाते हैं। यदि अफजल के परिजन उसके शव का अपने धार्मिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहें तो उन्हें क्यों नहीं करने देना चाहिए? इससे तो यह भी सिद्ध होगा कि मोदी सरकार वाकई दब्बू नहीं है और वह मानव अधिकारों और मानवीय संबंधों का सम्मान करती है। इसके अलावा अब तक के रवैये से क्या ऐसा नहीं लगता कि मोदी के रहते जम्मू-कश्मीर के हालात बिगाडऩे कोई जुर्रत नहीं कर सकता है।
Textile News
खादी इंडस्‍ट्री के लिए स्‍थापित होंगे.......
नई दिल्‍ली। सरकार ने रविवार को कहा है कि वह खादी और ग्रामीण इंडस्‍ट्री को बढ़ावा देने के लिए 850 करोड़ रुपए के निवेश के साथ 800 स्‍फूर्ती क्‍लस्‍टर की स्‍थापना करेगी। इन क्‍लस्‍टर्स की स्‍थापना प्रक्रिया मार्च 2017 तक पूरी की जाएगी।

एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्रा ने खादी और ग्रामीण इंडस्‍ट्रीज कमीशन (केवायआईसी) द्वारा आयोजित वर्कशॉप में कहा कि खादी और ग्रामीण इंडस्‍ट्री के आधुनिकीकरण के जरिये ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना गांवों में और निचले स्‍तर तक रोजगार पैदा किए जा सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि 12वीं पंच वर्षीय योजना (2012-17) के दौरान 800 स्‍फूर्ती क्‍लस्‍टर की स्‍थापना की जाएगी, जो कि खादी और ग्र......
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V-TEX ने किया काडाईकेनाल में होलसेल डीलर्स कॉ....
मुंबई/ वी-टेक्स लाइफ स्टाइल मिल्स ने कोडाईकेनाल, तमिलनाडु में 7 एवं 8 मार्च को होलसेल डीलर्स कॅान्फ्रेंस का आयोजन किया। इसमें तमिलनाडु सहित साउथ इंडिया तथा पाली, बालोतरा एवं मुंबई के 50 डीलर्स ने भाग लिया। इसमें ड्रेस मटीरियल, एम्ब्रॉयडरी, डाइड रुबिया, फैंसी रुबिया की अनेक वैरायटियां प्रदर्शित की गयी। इनको व्यापारियों ने भरपूर सराहा। इस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगभग 2000 गांठ की बुकिंग हुई।वी-टेक्स लाइफस्टाइल मिल्स के डायरेक्टर श्री सज्जन कवाड़ ने यह जानकारी दी। ज्ञातव्य है कि वी-टेक्स लाइफस्टाइल मिल्स ने गत साल अति आधुनिक मशीने इंस्टॉल की थी।

मौजूदा उत्पाद उनके नमूने हैं। V-TEX ब्रांड के कामकाज में लगातार तेजी बनी हुई है। बढ़ते काम काज का ऐसा आलम है कि कम्पनी देश भर में अब तक 100 डीलर नियुक्त कर चुकी है।

एक तरह से कहा जा सकता है कि आज इस कम्पनी के पास डीलर का बेहतरीन नेटवर्क है। श्री कवाड़ ने बताया कि V-TEX की कॉटन-लिनन की वैरायटी खूब डिमांड में रहती है।

कम्पनी ने इस वैरायटी में 40 से 50 कलर्स डवलप किए। कम्पनी का रेग्युलर सेल अच्छा चल रहा है। वैवाहिक सीजन के मद्देनजर कम्पनी ने व्हाइट की एक विस्तृत और आकर्षक रेंज डवलप की है। उसे बाजार से अच्छा रिस्पोंस मिल रहा है। गत दिनों कम्पनी की नेटवर्क रिटेल बुकिंग अच्छी हुई। उन्होंने बताया कि V-TEX ब्रांड की फैब्रिक का सेल डोमेस्टिक मार्केट के अलावा एक्सपोर्ट भी होता है। इनके पास डीलर नेटवर्क का एक विस्तृत जाल मौजूद है।

इसकी सप्लाई आरएमजी सेक्टर में भी होती है। आरएमजी सेक्टर की डिमांड को देखते हुए V-TEX अपनी रेंज में लगातार इजाफ कर रहा है। उसके अलावा एक्सपोर्ट के लिए v-tex ने एक नया डिविजन भी खोल दिया है।V-TEX ब्रांड की सप्लाई गल्फ कंट्रीज, कंट्रीज एवं युरोप में होने लगा है।
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ऐसा क्यों होता है कि कई बार सब कुछ होते हुए भी हम वो नहीं कर पाते जिसको करने के बारे में हमने सोचा होता है ….दृढ निश्चय किय....
मैं कई बार ऐसे लोगों से मिल चुका हूँ जो मुझसे अपने dream business की शुरुआत करने की बात करते है , घंटों planning करते हैं … .. बतात....
Interviews
श्री संजीव लाठिया
श्री संजीव लाठिया
इण्डिया ITME सोसाइटी के चेयरमैन - GTTES
GTTES - 20154 टेक्सटाइल मशीनरी उद्योग के लिए संभावनाओं का द्वार

मुम्बई गत 20 जनवरी से 22 जनवरी, 2015 तक मुम्बई के एग्जिक्यूटिव सेण्टर गोरेगांव में Globle Textile Technology abd Engineering Show -2015 (GTTES - 2015) आयोजित की जा रही है।
इसमें विश्वभर से उत्पादित टेक्सटाइल मशीनरी एवं टेक्नोलॉजी का डिस्प्ले किया गया। इण्डिया ITME सोसाइटी के चेयरमैन श्री संजीव लाठिया ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मॉडर्न टेक्नोलॉजी को भारत लाने के उद्देश्य से 34 वर्ष पूर्व ITME सोसायटी का श्रीगणेश हुआ था। इसने टेक्सटाइल उद्योग के विकास में एक उत्प्रेरक का कार्य किया है। ITME सोसायटी ने सफलता पूर्वक अपने काम को अंजाम दिया है। इस वर्ष इस संस्था ने नये बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए नयी चुनौती को स्वीकार किया है।
GTTES एशियन बाजार तथा टेक्सटाइल मशीनरी एक्सेसरीज, स्पेयर पार्ट्स रॉ-मेटेरियल्स तथा सम्बद्ध सेवा आदि का एक व्यापक (एक्सक्लूसिव) शो है जिसे ITME सोसयाटी ने आयोजित किया है।
श्री लाठिया ने बताया कि इस विशेष प्रदर्शनी के कई उद्देश्य हैं। यह टेक्नॉलोजी एवं मशीनरी की प्रदर्शनी के साथ ही उच्च क्वालिटी, वैरायटी, एलायड सर्विसेज की प्रदर्शनी भी है। यह छोटे और मध्यम एंटरप्राइजेज वाले क्लाइंट की बड़ी मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी महज एक प्रदर्शनी नहीं है। यह बिजनेस आदि को एक माहौल भी प्रदान करेगा। बेहतर नेटवर्किंग की बदौलत यह सेल और सर्विस की क्वालिटी भी उन्नत करेगा। यह व्यक्तिगत अंत:क्रिया के माध्यम से कस्टमर्स संबंधों को प्रगाढ़ करेगा। यह ओवरसीज, रिजनल, डोमेस्टिक बाजारों में नई लीडरशिप भी डवलप करेगा तथा यह छोटे और मध्यम क्लाइंट बेस तक पहुँचेगा।

GTTES 2015 का महत्व - एशिया में उपलब्ध संभावनाओं की तरफ विश्व की नजर खीचनें के उद्देश्य से ये प्रयास जारी है।

आज एशिया टेक्सटाइल मशीनरी का सबसे बडा बाजार एवं विश्व टेक्सटाइल उद्योग का केन्द्र है। आज एशियन बाजार को हाई परफोर्मेंस, हाई क्वालिटी, ऑटोमेशन की हाई डिग्री तथा इनर्जी सर्विस मशीनरी एवं इक्विपमेण्ट की निहायत जरूरत है।
इंटर एशिया टे्रड प्रेडिक्शन के अनुसार एशिया महादेश नये फेज में प्रवेश करने जा रहा है। 2015 तक इंटर- एशिया ट्रेड की मौजूदा 180 बिलियन यू एस डॉलर की तुलना में दुगुना होकर 350 बिलियन यूएस डॉलर के होने की संभावना है। तब यह निर्यातक देशों के लिए सबसे बड़ा मार्केट ब्लॉक बन जाएगा।
श्री संजीव लाठिया ने बताया कि 180 बिलियन यूएस डॉलर के वृहत इंट्रा एशिया-टे्रड के 8 प्रतिशत CAGR की दर से वृद्धि को देखते हुए, इंडिया ITME सोसायटी ITME सीरीज के साथ अलटरनेटली एक्जीबीशन लॉञ्च कर रही है।
श्री लाठिया ने कहा कि भविष्यवाणी की गयी है कि आगामी वर्षों में विश्व टेक्सटाइल उद्योग एवं टेक्सटाइल इंजिनीयरिंग उद्योग का केन्द्र एशिया होगा। विश्व का 70 प्रतिशत से अधिक फाइबर प्रोसेसिंग एशिया में होता है। चीन, भारत एवं पाकिस्तान संयुक्त रूप से 60 प्रतिशत फाइबर उपयोग में लाते हैं।
यह भी भविष्यवाणी की गयी है कि चीनी एवं भारतीय अपेरल-मार्केट का आकार अमेरिका एवं यूरोप के संयुक्त मार्केट आकार से बढऩे जा रहा है। टेक्सटाइल इंजिनीयरिंग एवं सेवा के लिए भविष्य में यह संभावनाओं का द्वार खोलेगा। बांग्लादेश एवं वियतनाम भी प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल देश के रूप में उभर रहे हैं।
टेक्सटाइल एवं अपेरल एक्सपोर्ट के एक शक्तिशाली टे्रड ब्लॉक के रूप में संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए टेक्सटाइल उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि एशियन-कंट्रीज में बिजनेस टाई-अप्स स्थापित किए जाय और इस बढ़ाया जाए।
इंडिया ITME सोसायटी के चेयरमैन श्री लाठिया ने बताया कि GTTES - 2015 की प्लानिंग एवं रुपरेखा इस तरह तैयार की गयी है ताकि यह एशियन-टेक्सटाइल मार्केट के लिए एक्सक्लूसिव एवं फोकस्ड बिजनेस इवेंट साबित हो।

श्री लाठिया ने कहा कि भारत के डोमेस्टिक कंजम्पशन एवं निर्यात के लिए भारतीय उत्पादन विश्व के औसत उत्पादन से आगे ग्रोथ के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि 2025 तक उम्मीद है कि भारतीय डोमेस्टिक अपेरल कंजम्पशन बढ़कर 200 बिलियन यूएस डॉलर हो जाएगी, जो विश्व के कई बड़े कन्ज्यूमर्स जैसे जापान, ब्राजील, रूस आदि से ज्यादा है। 2025 में 2012 के 45 बिलियन यूएस डॉलर का 4 गुणा बढ़ा जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारत अपेरल, हैडीक्राफ्ट और कुछ अन्य उद्योगों के लिए उभरता हुआ मल्स एवं रिटेल इंडस्ट्री एक व्यापक संभावना पैदा करता है। यह संभावना पूरे वैल्यूचेन तथा अन्य प्रॉडक्ट सेग्मेंट सभी के लिए होगा।

इसी के बीच से मशीनरी सप्लायर्स एवं इससे संबंद्ध व्यापार जैसे केमिकल्स कन्ज्यूमेबल्स, लॉजिस्टिक सभी के लिए व्यापक बाजार खुलेगा।
उन्होंने भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि इसमें टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम ने 1,51,000 करोड़ रुपयों की बदौलत मशीनरी सेक्टर को एक बड़ा सपोर्ट दिया है।
श्री लाठिया ने कहा कि इसमें अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए उत्पादकों एवं टे्रडरों को क्षेत्रीय बाजार एवं ग्रामीण बाजार पर ध्यान केंदित करना पड़ेगा। इसमें अपार अनएक्स्प्लोर्ड वर्जिन संभावनाएं दिखायी पड़ेगी, जिसका वे लाभ उठा सकेंगे।
जरुरत है सप्लाई चेन डवलप करने की, जो उभरती डोमेस्टिक बाजार को कैटर कर सके। साथ ही पड़ोसी एशियन देशों में भी कस्टमर्स ढुढऩे की जरूरत नहीं पड़ेगी।